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टिक्की की पाठशाला: आदिवासी उद्यमियों ने जाना व्यापार संबंधित कागजात बनाने की प्रक्रिया, नए युवा उद्यमियों में दिखा उत्साह Tikki Ki Pathshala : Tribal entrepreneurs learned the process of making business related documents


जादूगोड़ा : ट्राइबल इंडियन चैंबर आफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, झारखंड चैप्टर की ओर से ट्राईबल कल्चर सेंटर, सोनारी, जमशेदपुर में टिक्की की पाठशाला कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में व्यापार में रुचि रखने वाले युवाओं के अलावा काफी संख्या में आदिवासी उद्यमियों ने भाग लिया। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम लिमिटेड, जमशेदपुर शाखा के अधिकारी मोहम्मद जीशान के अलावा टिक्की के राष्ट्रीय महासचिव बसंत तिर्की उपस्थित थे। इस दौरान कार्यक्रम के बाबत बसंत तिर्की ने बताया कि टिक्की की पाठशाला कार्यक्रम एक मुहिम है, जिसका उद्देश्य आदिवासी उद्यमियों को छोटे सामानों की विनिर्माण में भागीदारी को बढ़ाना है। यह मुहिम देश के कुल 15 टिक्की चैप्टर राज्यों में चलाया जाएगा जिसमें लग्नशील एवं होनहार आदिवासी युवाओं को विनिर्माण  के लिए तैयार किया जाएगा। यह कार्यक्रम सप्ताह में एक दिन ट्राईबल कल्चर सेंटर में ही संचालित किया जाएगा जिसमें टिक्की के द्वारा कागजात, प्रशिक्षण, विपणन, वित्त, ट्रेडमार्क, ब्रांडिंग इत्यादि में प्रशिक्षण के साथ-साथ हैंड होल्डिंग सहयोग भी दिया जाएगा। राष्ट्रीय महासचिव ने बताया कि विनिर्माण के क्षेत्र में खुले बाजार एवं संस्थागत बाजार दोनों में अपार संभावनाएं हैं। कहा कि टाटा समूह भी एफर्मेटिव एक्शन के तहत आदिवासी युवाओं को उद्यमिता के क्षेत्र में निरंतर अवसर प्रदान कर रही है। एवं विनिर्माण के क्षेत्र में आदिवासी उद्यमियों को आने से समाज में आर्थिक संपन्नता के साथ-साथ उद्यमिता जागरूकता तेजी से आएगी और मेक इन इंडिया को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, आदिवासी समाज में उद्यमिता कलर को भी बढ़ावा मिलेगा। उधर, राज्य सरकार द्वारा भी नई एमएसएमई पॉलिसी लाई गई है जिसमें पूंजीगत सब्सिडी 40% दी गई है। बताया कि उसमें ब्याज सब्सिडी के साथ अन्य सुविधाएं भी दी जा रही है। उन्होंने जानकारी उपलब्ध कराते हुए बताया कि केंद्र सरकार जेम से खरीदारी को अनिवार्य करने पर स्थानीय उद्यमियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है l वहीं, केंद्र सरकार द्वारा उत्पाद में ब्रांड एवं गुणवत्ता समाप्त करने से भी उद्योग धंधों का नीति शास्त्र खत्म हो रहा है। सरकारी उपक्रमों में घटिया सामानों की आपूर्ति की जा रही है। वर्तमान समय में कंपनियां चीन से भी घटिया और सस्ता सामान बनाने की तैयारी में है। इसपर केंद्र सरकार को ध्यान देना चाहिए। इस मौके पर राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम के अधिकारी मोहम्मद जीशान ने व्यापार संबंधी कागजात बनाने की प्रक्रिया के बारे में बताया और किस तरह हम इन कागजातों के माध्यम से व्यापार धंधों को बढ़ा सकते हैं, यह भी जानकारी उपलब्ध कराई। उद्यम रजिस्ट्रेशन, एकल बिंदु पंजीयन, एमएसएमई ग्लोबल मार्ट आदि की जानकारी भी उपलब्ध कराई गई l कार्यक्रम में मुख्य रूप से  कुंवर नाग, राज मार्शल मादी, रंजन मराठी, जोसेफ कारूवा, जोसेफ कांदिर, शेखर कारूवा, सुरेंद्र टुडू, रामलाल महाली, रूपलाल बास्के, दिलीप सवासी आदि उपस्थित थे।
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